विश्व पत्रकारिता दिवस पर पूरे बिहार की खबरों की समीक्षा

Image result for newsबिहार में कुछ ऐसी घटनाये हुई है जिसकी चर्चा आज भी होती है तो राजनीतिज्ञ ,पुलिस और सत्ता के गठजोड़ का घिनौना चेहरा सामने आ जाता है ,, जी है याद करिए बांबी हत्याकांड ,,,याद करिए गौतम शिल्पी हत्याकांड नाम सूनते ही सिस्टम का वो धिनौना चेहरा सामने दिखने लगता है,, इन दोनों घटनाओं को लेकर उस वक्त जबरदस्त मीडिया ट्रायल हुआ था हलाकि कानून कि नजरो में तमाम आरोपी बरी हो लेकिन आज भी लोगों के जेहन में सब कुछ उसी तरह दौर रहा है। इसी तरह कि घटना हाल के दिनों में एक बार फिर सुर्खियों में आयी है,, जी है कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री की बेटी ने पटना के एक बड़े ररुख वाले पर रेप और ब्लैकमैल करने का आरोप लगा सनसनी फैला दिया खबर आती ही मीडिया ट्रायल शुरु हो गया मुकदमें दर्ज हुए पांच माह होने को है इस दौरान लगातार पीड़िता को न्याय मिले इसके लिए मीडिया ट्रायल चल रहा है।

हमलोग भी इस मामले को लेकर लगातार साक्ष्य जुटा रहे हैं और आरोपी को कठोर से कठोर सजा मिले इसके लिए लगातार पुलिस पर दबाव बनाये रखा आखिरकार तीन माह बाद मुख्यअभियुक्त निखिल प्रियदर्शी गिरफ्तार हुआ लेकिन इसके गिरफ्तारी के बाद जिस तरीके से निखिल के सगुना मोड़ स्थिति जमीन पर रातो रात कब्जा हो गया उस पर मांल बनने का काम शुरु हो गया और इसी दौरान कांग्रेसी नेता ब्रजेश पांडेय औऱ निखिल प्रियदर्शी के परिजन आंफिस पहुंच कर सच का साथ देने का आग्रह करते हुए कई साक्ष्य दिये जो कही ना कही पीड़िता के बयान पर सवाल खड़े करने लगा लेकिन जैसे ही इस और काम करना शुरु हुआ अचानक खबर नही चलाने के लेकर दबाव दिया जाने लगा,,,केस किये जाने कि तैयारी शुरु हो तब मुझे लगा कुछ तो जरुर बात है और फिर शुरु हुआ पीड़िता के खेल का पोस्टमार्टम,,, सच कहिए ऐसा धिनौना खेल इज्जत को दाव पर लगा कर खेला जा सकता है 20 वर्षो के पत्रकारिता जीवन में पहली बार ऐसा महसूस हुआ। एफआईआर से लेकर चार माह के दौरान एसआईटी ने जो अनुसंधान किया है उसका एक एक शब्द महसूस करा रहा है कि किस तरीके से जमीन जायदाद और राजनैतिक प्रतिद्वदता में लोग अपना सब कुछ दाव पर लगा सकता है।

इस खेल में ये भी पता चला कि बिहार बोर्ड कि तरह सीबीएससी में भी बच्चा राय और लालकेश्वर जैसे लोग काम कर रहा है और उसी तरह का नम्बर का खेल चल रहा है। इस खेल में मुजफ्फरपुर का एक स्कूल पारामाउंट के खेल का भी खुलासा हुआ है कि किस तरीके से बच्चा राय कि तरह फर्जी स्कूल चला कर बच्चों को टांप करवा रहा है जी है पीड़िता नेट्रोडम स्कूल पटना कि छत्रा रही है 10वी वो नेट्रोडेम और पारामाउट दोनों जगह से फर्म भरा दोनों जगह से परीक्षा भी दी है नेट्रोडेम में वो फेल कि है और पारामाउट में 98.9 प्रतिशत मार्कस के साथ टांप कि है जी है इतना ही पीड़िता सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर कन्या मध्य विधालय में 6,7,और 8 कि पढाई कि ये डिग्री फर्जी पायी गयी है स्कूल के प्रिंसपल ने छात्रा के स्कूल लिभिंग सार्टिफिकेट को फर्जी बताया जिसके आधार पर छात्रा ने पारा माउंड स्कूल मुजफ्फरपुर में 9 वी क्लास में नाम लिखायी थी।

आप समझना चाह रहे होगे कि इस रेप से लड़की के डिग्री का क्या सम्बन्ध  है जी है पारामाउन्ट जहां के 10 वी पास होने कि बात कर रही है उसके अनुसार ये नवालिक है हलाकि मुकदमें दर्ज करने के समय घटना के बारे में जो बतायी है वो एक वर्ष पहले बोली है उस आधार पर रेप मामला पोस्को के तहत चल रहा है जबकि नेट्रोडेम के डिग्री का माने तो इसका उर्म 20 वर्ष से भी ज्यादा है। अब आप समझ गये होगे कि आखिर डिग्री का क्या लोचा है इस मुकदमें से,,, खेल ये नही है इससे बड़ा खेल ये है कि इस साक्ष्य को एसआईटी ये कहते हुए खारिज कर दिया कि नेट्रोडेम और सीबीएससी सहयोग नही कर रही है बताईए इस साक्ष्य से पूरे मुकदमें का भविष्य तय होगा और ऐसे साक्ष्य से पुलिस मुख मोड़ रही है पुलिस का यही एक्ट पूरे खेल पर से पर्दा उठा दिया है क्यों कि इस मामले का मुख्य आरोपी जेल से जब पुलिस को ये सूचना देता है कि मेरे जमीन पर कब्जा किया जा रहा है और जो थानेदार जेल से आय़े आवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज करता है वो भी ऐसे व्यक्ति पर के खिलाफ याद करिए हैलीयस ग्रुप बिहार के लाखों लोगो का निवाला छिन लिया था वो मुख्य अभियुक्त बनाया गया लेकिन पटना पुलिस कारवाई करने के बजाय एफआईआर करने वाले थानेदार को ही लाइन हाजिर कर दिया गया,,, इतने बड़े स्तर पर खेल चल रहा है देखिए आगे आगे होता है क्या।

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