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बिहार की प्रचलित कुप्रथा 'पकड़ौआ विवाह' के पीछे की वजह और सच्चाई

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पकड़ौआ विवाह खासकर बिहार राज्य में प्रचलित एक कुप्रथा है। इसमें शादी योग्य लड़के को घर या उनके कार्यस्थल से अपहरण कर तय जगह पर ले जाते हैं और जितनी जल्दी (25-30 मिनट) में शादी कर देते हैं। शादी के लिए नहीं मानने पर लड़के के साथ मारपीट की जाती है। गोली मारने की धमकी दी जाती है। हथियार से आतंकित कर जबरदस्ती लड़की की मांग में सिंदूर डलवाया जाता है। क्यों:- इसके पीछे बड़ी वजह दहेज था। ज्यादा दहेज देने से सक्षम न होने के कारण गांव के लोग अपने जानने वालों से पता कर एक लड़के का चुनाव करते थे। जो ढंग का कमाता हो या जमीन-जयदाद ज्यादा हो। खेती बाड़ी खुद संभालता हो। उसके पीछे काफी मेहनत करते थे। जैसे- बार बार जाकर लड़के के पिता को कहना कि आपके लिए हमने एक लड़की देखी है अगर कहो तो आपके बेटे की शादी करवा देता हूं, लड़की अच्छी है। अगर नहीं माने तो फिर हंसी मजाक में कह देते थे कि आपके लड़के को उठवा लूंगा। इसके बाद वो तैयारी करना शुरू कर देते थे। मौका मिलते ही लड़के को हथियार के बल पर और दबंगों की सहायता से उठवा लिया जाता था। शादी के बाद:- शादी के बाद लड़का कहता है कि मैं फांसी पर चढ़ गया। अब लड़की और लड़के के गांव...

लिट्टी चोखा बिहारी के लिए व्यंजन नहीं एहसास है

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मुझे घर से बाहर रहते हुए 12 साल हो गए। पहले पटना, रांची और कोलकाता की यात्रा के बाद 2015 में हरिद्वार आया और 2017 से दिल्ली-एनसीआर में हूं। लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़ाव कभी खत्म नहीं हुआ। मैंने पिछली होली 2014 में परिवार के साथ मनाया था। हर साल पर्व त्योहार पर घर की याद आती रहती है। जब पटना में था शनिवार-रविवार घरवालों के साथ ही बिताता था। अब ऐसा वक़्त आया है कि साल या दो साल में एक बार ही घर जा पाता हूं। सच में जहां आपका बचपन बीतत ा है उस जगह को आप भुला नहीं पाते, यही मेरे साथ भी है। समय बदलने के साथ साथ हालात भी बदलता है और एक समय ऐसा आता है जब घर का मोह छोड़कर कुछ कर गुजरने की चाहत आपको सभी चीजों से विरक्त कर देती है। आज सुबह अचानक लिट्टी बनाने का प्लान बना सोचा चलो इसी बहाने कुछ पुरानी यादों का ताजा कर लिया जाए। घर पर ठंड के दिनों में पापा उपले (गोइठा) पर सेंककर बनाते थे। यहां व्यवस्था न होने के कारण तेल में फ्राई कर बनाने का सोचा। वैसे छुट्टी होने के कारण आलस्य की पराकाष्ठा पर कर चुका था। अचानक दिमाग में आईडिया आने के बाद शरीर में फुर्ती आ गयी। तुरंत उठकर समान तैयार...

बिगबॉस-12 की कुछ यादें जो कभी भुलाई नहीं जा सकती!

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आखिर वो 106 दिन का सफर एक विनर के साथ समाप्त हो गया। कई लोग सपने लेकर किस्मत आजमाने आए। कुछेक का सपना टूटता चला गया। वे घर से बेघर होते चले गए। इन सब के बीच हम जैसे दर्शक जो बड़ी शिद्दत से व्यस्त समय से एक घंटा निकाल लेते थे। कुछ ग्रुप में गॉशिप भी कर लेते थे। इसकी आदत बन गयी थी। लगता था हमारी दिनचर्या में एक काम ये भी शामिल है। रात के 12 बजे या एक बजे ऑफिस से आने के बाद पहला काम इस शो को देखना ही था। कुछ प्रतिभागी फेवरेट थे जैसे शिवशीष, रोमिल, सोमी, नेहा पेडसे, सृष्टि, श्रीशांत, दीपक, सुरभी, करणवीर और दीपिका। इन सब में कुछ का सफर जल्द ही समाप्त हो गया लेकिन छोटे शहर से आये लोगों ने सब के दिलों पर राज किया। सुरभी :- हिमाचल प्रदेश की लड़की जिसने सभी टास्क में योगदान दिया। 5 बार कैप्टन रही। एक बार नॉमिनेट हुई वो भी श्रीशांत ने किया था। टिकट टू फिनाले जीत चुकी थी। इतनी उपलब्धि के बाद 15 वें हफ्ते घर से बाहर हो जाना दर्शकों के लिए निराशाजनक था। रोमिल :- हरियाणा के रोहतक जिले के वकील बाबू के अंदर काफी जज्बा था। काफी दमखम रखते थे। लेकिन कमी एक ही थी उनके लिए कई बार मु...