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BIG BOSS Weekend ka vaar जानें कौन हुआ इस हफ्ते बाहर

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बिग बॉस के वीकेंड का वार में काफी कुछ हुआ। आज पहला एलिमिनेशन था। खुशी की बात ये है कि इस हफ्ते किसी को बेघर नही किया गया। इसके लिए कृति-रोशमी, सौरभ-शिवाशीष, सबा-सोमी पर घर से बेघर होने की तलवार लटक रही थी। ऐसा बिग बॉस के इतिहास में पहली बार हुआ है। इससे पहले जनता  ने सृष्टि और दीपिका को शो से बाहर होने से बचा लिया है। वहीं,  इसके अलावा वरुण धवन अपनी अपकमिंग फिल्म सुई धागा के प्रमोशन के लिए घर के अंदर आए। उन्होंने कुछ टास्क दिया था जो सिंगल बनाम जोड़ी के लिए थी इसमें जोड़ी की जीत हुई। रविवार को दो जोड़ियां सुल्तानी अखाड़े में उतरी। दीपिका और सृष्टि रोडे ने सबा खान और सोमी खान को अखाड़े में चैलेंज किया। पहला राउंड बातों की थी जो जोड़ी जीत गयी और दूसरा राउंड कबड्डी की थी जिसमें सिंगल ने बाजी मारकर 2-1 से खान बहनों को हराकर सिंगल जीत गयी। इसमें सृष्टि और दीपिका की जोड़ी की जीत हुई। सलमान खान ने इस जोड़ी को सुपरपावर भी दी। वहीं, वरुण धवन ने कंटेस्टेंट्स को एक टास्क दिया। इस टास्क में जोड़ियों ने सिंगल को मात दी। इन सब के अलावा अब जोड़ियों में दरार पड़ना शुरू हो चुका है। पहल...

जब पटना के छात्रों ने कोचिंग संस्थान के शिक्षकों के खिलाफ आवाज उठाई थी

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हर कोई उच्च शिक्षा पाने के लिए शहर की ओर रुख करता है। बिहार के छात्र भी 10वीं पास कर आंख में इंजीनियर या डॉक्टर बनने का सपना लेकर राजधानी पटना की ओर रुख करते हैं। यहां कोचिंग संस्थान में एडमिशन लेकर जीतोड़ पढ़ाई करते हैं। बड़ी संख्या में छात्र होने के बाद कोचिंग सेंटर वाले भी मनमानी पर उतारू हो जाते हैं। आखिर कब तक छात्र इनकी मनमानी सहते। एक कहावत है स्प्रिंग को जितना दबाओगे छोड़ने पर वह तेज गति से उछलती है। इसका उदाहरण वर्ष 2010 में देखने को मिला जब एक संस्थान में गार्ड की बंदूक से एक छात्र को गोली लग गयी और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। छात्रों के आक्रोश ने काफी तबाही मचाई थी। प्रतीकात्मक तस्वीर बात उन दिनों की है जब बिहार में शिक्षकों के खिलाफ छात्रों ने आवाज उठाई थी। पटना के अधिकांश कोचिंग में छात्रों द्वारा उत्पात मचाया जा रहा था। सभी शिक्षक अपने संस्थानों को बंद कर छात्रों को पढ़ाने से इन्कार कर चुके थे। छात्रों का इतना उग्र रूप जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के बाद बिहार की राजधानी में पहली बार देखने को मिल रहा था। छात्रों के उग्र रूप की शुरुआत एक कोचिंग संस्थान से हुई। किस...

बड़ा मनहूस है ये बंगला, कोई भी मंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया

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भूत बंगले के बारे में तो आप सभी ने सुना ही होगा या कई फिल्मों में देखा भी होगा। कोई अदृश्य शक्ति बंगले में किसी को घुसने नही देती है और अगर कोई जाता भी है तो उसे किसी कारणों से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। यही बात यहाँ भी सिद्ध हो रही है। यह मनहूस बंगला किसी भी मंत्री को उनका कार्यकाल पूरा करने नहीं देता। ऐसे ही बंगले के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। यह सरकारी बंगला बिहार की राजधानी पटना में है। जब से मुजफ्फरपुर कांड हुआ है तब से यह बंगला काफी चर्चित हो गया है। पटना के स्ट्रैंड रोड पर स्थित बंगला नंबर 6 लोगों के बीच अब चर्चा का विषय बन गया है। यह बंगला नीतीश सरकार में समाज कल्याण विभाग की मंत्री कुमारी मंजू वर्मा को आवंटित है। हालांकि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और अब उन्हें ये बंगला खाली करना होगा। दरअसल, उनके पति के ऊपर मुजफ्फरपुर कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ संबंधों को लेकर आरोप लगा है, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया है। बंगला नंबर 6 में रहने वाले मंत्रियों के पिछले कुछ सालों के आंकड़ों को देखें तो इस बंगले ने अब तक तीन मंत्रियों को उनका कार्...

कोलकाता का ऐसा बाजार जहां नुमाइंदगी होती है जिस्म की

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उतनी गिनती भी नही आती, जितने लोग मेरे उपर चढ़ जाते हैं। मेरी चादर के फूल भी शर्म से लाल हो जाती है। बस एक चीज लाल नहीं होती...मेरी मांग! मुझे सोनागाछी में सस्ते पाउडर लिपिस्टिक की पर्तों में छुपी ज़िंदा लाशों का क्रंदन इस क़दर सुनाई देता है। लगता है, जैसे पूरा सोनागाछी एक श्मशान है ,जहाँ हर कदम एक लाश जल रही है या दफ़न हो रही है।  यहाँ लड़की जैसे ही अपनी दैनिक वृत्तियों को लेकर आत्मनिर्भर हो जाती है यानी फौरन औरत बन जाती है। माहवारी शुरू होने के पहले ही उसे ग्राहक को रिझाने औऱ देर तक उसे यौन के संलिप्त रखने के गुर सीख लेना ज़रूरी होता है क्योंकि कच्ची कली के पहली बार खिलने की खुशबू इस क़दर हमारे देश के कामुक पुरुषों को मतवाला करती है। जब यहाँ किसी लड़की का ज़िस्म पहली बार मंडी में उतरता है तो उसके ख़ैरख्वाहों और दलालों को तगड़ी रक़म ग्राहक से मिलती है।  बाक़ायदा लड़कियाँ बॉलीवुड के सस्ते आयटम गानों पर भड़काऊ ढंग से नाचना सीखती हैं। शाम होते ही उनकी नुमाइश शुरू हो जाती है और रात गुजरते हुए ये लड़कियां या अपना जिस्म हारती है या ज़िन्दगी की दौड़ में रोटी हार जाती है। पश्चिम बंगाल...

Dhadak movie review : आगाज वही अंजाम नई

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हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया और बद्रीनाथ की दुल्हनिया फिल्मों का निर्देशन  निर्देशक शशांक खेतान ने   किया है, जिसमें मंझे हुए कलाकार वरुण धवन और आलिया भट्ट काम करते हुए नजर आये। इस बार शशांक ने नए कलाकार ईशान खट्टर और अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर के साथ धड़क फिल्म बनायी है। हालांकि यह फिल्म ब्लॉकबस्टर मराठी फिल्म सैराट की ऑफिशियल हिंदी रीमेक है। सैराट फिल्म को पिछले साल 2017 में कन्नड़ और पंजाबी में भी रीमेक किया गया और इस साल इसका हिंदी रूपांतरण रिलीज हो गया है। फिल्म की कहानी उदयपुर से शुरू होती है जहां के रहने वाले रतन सिंह (आशुतोष राणा) बहुत ही दबंग इंसान है और उनकी बेटी पार्थवी सिंह (जाह्नवी कपूर) है। उदयपुर में ही एक रेस्टोरेंट चलाने वाले परिवार का लड़का मधुकर बागला (ईशान खट्टर) है, जो टूरिस्ट गाइड का भी काम करता है। मधुकर और पार्थवी के बीच आंखे मिलती हैं और प्यार हो जाता है जो बात रतन सिंह और उसके बेटे को बिल्कुल भी नहीं पसंद है। जिसकी वजह से कहानी में बहुत सारे ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं। कहानी उदयपुर और नागपुर होते हुए कोलकाता पहुंचती है, अंततः क्या होत...

मेरठी हैं कूल डूड : टी शर्ट दिवस पर विशेष

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मेरठ के लोगों में स्वैग काफी होता है। वे खुद को कूल दिखाना पसंद करते हैं। अगर आपके टी शर्ट पर जाट, गुर्जर या सख्त लौंडा लिखा हो तो लोगों का ध्यान खुद ब खुद चला जाता है। 21 जून को टी शर्ट डे है। आइये जानते हैं मेरठ में टी शर्ट के चलन के बारे में... मेरठ शहर खास तौर पर स्पोर्ट्स और कैंची के लिए मशहूर है। इसके अलावा यहां स्पोर्ट्स वियर काफी मशहूर है। खेल से संबंधित कपड़ो की डिमांड देश ही नहीं विदेशों में भी है। मेरठ की धरती से ढेरों फैशन के चलन निकले हैं। आजकल के युवा टी शर्ट पहन कर कूल दिखने की कोशिश करते हैं और उन्हें कूल लगने के लिए बाजार में कई तरह के टी शर्ट्स उपलब्ध है जैसे जाट व गुर्जर समेत अन्य टीशर्ट्स लोग काफी पसंद कर रहे हैं। योग टी शर्ट की बढ़ रही डिमांड 21 जून को विश्व योग दिवस है इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह है। इसे देखते हुए लोगों में योग से संबंधित टी शर्ट की डिमांड काफी बढ़ गयी है। टी शर्ट पर लिखे योगस्य चित्त वृति निरोध:, करो योग रहो निरोग के अलावा योगासन व संस्कृत के श्लोक  छपे टी शर्ट्स लोगों ने पहनने शुरू कर दिए हैं। मोदी-योगी की बढ़ी डिमांड युव...

क्या एक संपादक और एक जवान के मारने से अल्लाह खुश हो गया?

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14 जून 2018 की शाम अचानक मेरे फ़ोन पर एक अलर्ट आया। उस वक़्त मैं अपने ऑफिस में खबरों के साथ आंख मिचौली खेल रहा था यानी संपादन कर रहा था। फ़ोन उठा कर देखा तो बीबीसी का अलर्ट था। लिखा था कि कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी पर हुआ हमला, हालत गंभीर। उस वक़्त तो सिर्फ देखकर रह गया। थोड़ी देर में वाट्सएप पर अनगिनत मैसेज आने शुरू हो गए। एक मैसेज खोल कर देखा तब पता चला कि शुजात बुखारी की मौत हो चुकी है। शुजात बुखारी की हत्या आने वाले दिनों के लिए एक खतरनाक संकेत है। ये डरावने सिलसिले की एक कड़ी लगती है। इस कत्ल की निंदा और भर्त्सना के लिए सही शब्द नहीं मिल रहे हैं। क्या गलती थी उस संपादक की आखिर क्या गलती थी उस संपादक की जो थोड़ी देर पहले इफ्तार के लिए जा रहा था। क्या वे काफिर थे या यूं कहें तो वे आतंकवादियों की नजर में गुनाहगार थे। इन्हें मारने से अल्लाह खुश हो गया। कहा जाता है कि रमजान के पाक महीने में रोजा रखने से इंसान के ईमान में बरक्कत आती है। क्या यही बरक्कत दी थी आतंकवादियों को अल्लाह ने? कहा जाता है कि शुजात बुखारी कश्मीर में अमन और शांति चाहते थे। वे धारा 370 के समर्थक भी थे।...

खैनी...बिहार की पहचान : यहां लोगों का स्वागत स्वैग से नहीं खैनी से होता है

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एक पंडितजी रास्ते से जा रहे थे तभी सामने से आवाज आई अरे पंडितजी कहां जा रहे हैं खैनिया त खा के जाईं। पंडितजी तुनककर बोले... अरे भक मर्दे अभी जजमानी में दसो रुपिया नहीं हुआ है, आ सूरज भी माथा पर चढ़ आया है। का करें खैनी खा के, घर जाएंगे त मेहरारू फिर से चिल्लाएगी... कि आ गए खाली हाथ, कइसे जजमानी करते हैं कि दस गो रुपिया नहीं जुड़ता है आपसे। इतना बोलते ही शर्मा जी बोले.. अरे ऊ सब छोड़िये गुस्सा पहिले खटिया पर बईठीये। का बइठे शर्मा जी बहुते परेशान हैं बेटा नालायक निकल गया है। ससुरा दिल्ली कमाने चला गया अउर जब से शादी किया है तब से पईसे नहीं भेजता है। तभी शर्मा जी बोले अरे ऊ सब छोड़िये लीजिये ई चिनउटी आ खैनी बनाइये। शर्मा जी ने अपने बेटे को आवाज लगाई अरे जित्तन जरा एक लोटा पानी लेते आना अउर देखो त का बनाई है तोहर माई। ई लीजिये पंडित जी पानी पीजिये। अउर खाना भी आ रहा है अभी जित्तना के माई ले के आती ही होगी। जित्तन की माँ खाना लेते हुए आयी अउर बोली...गोर लागी पंडित जी ई ली खाना खायीं । पंडित जी बोले...जियत रहीं भगवान अईसे ही भंडार भरल रखे। अउर सब कुशल मंगल है न घर में। जीपंडितजी। जाईं क...

सुलग रहे हैं उत्तराखंड के जंगल, कैसे बचेंगे जान-माल

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उत्तराखंड के जंगल में लगी भीषण आग वर्षों से उपेक्षित रहे राज्य उत्तराखंड में काफी समस्या है। यहां  शिक्षा, स्वास्थ्य व बेरोजगारी के साथ संसाधनों की कमी के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हैं। इसके साथ हरेक साल जंगलों में आग लग जाने के कारण यह समस्या बन गयी है।  छह राष्ट्रीय पार्क, सात अभयारण्य और चार कंजर्वेशन रिजर्व वाला उत्तराखंड इन दिनों जंगलों की आग से हलकान है। 71 फीसद वन भूभाग वाले राज्य में जंगल सुलग रहे हैं। इससे वन संपदा को तो खासा नुकसान पहुंच ही रहा है साथ ही बेजुबान जानवर भी अपनी जान बचाने को इधर-उधर भटक रहे हैं। यही नहीं, वन्यजीवों के आबादी के नजदीक आने से मानव और इनके बीच संघर्ष तेज होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जंगल की दहलीज पार करते ही उनके शिकार की भी आशंका है। जंगल में लगी आग के कारण वन्यजीव ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे हैं और इससे आम लोगों के सुरक्षा के साथ वन्यजीव की सुरक्षा भी सूबे की अहम समस्या बन गयी है। हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि राज्यभर में गांवों, शहरों से लगी वन सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। साथ ही जंगल में वन्यजीव...

शैतान से इंसान बनने की एक लड़के की कहानी पार्ट-1

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एक जमाना था कि वो दिन को दिन नहीं समझता था और अंधाधुन अपने काम करने में मस्त था. कौन सा काम ? वही जो एक आम इंसान नहीं कर सकता, जिसे करने के लिए बहुत हिम्मत की जरुरत पड़ती है, जो एक बार इस दलदल में पड़ जाये तो वो आसानी से निकल नहीं सकता, उसके लिए या तो जेल की सलाखें होती है या मौत ! बात करते है बिहार के एक ऐसे लड़के की जिसे सिर्फ मशहूर और दौलतमंद बनने का जूनून सिर पर सवार था। इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार था। बिहार के ऐतिहसिक स्थान में पैदा हुआ। उसने खुद को ऐसे माहौल में ढाल लिया कि लोग उससे खौफ खाने लगे। हालाँकि आम आदमी को इस बात की भनक तक नहीं थी लेकिन जो इस क्षेत्र में थे उन्हें भलीभांति पता था कि वह कर क्या रहा है और वह करना क्या चाहता है। बस उसके जेहन में एक बात घूमती रहती थी कि मुझे बहुत ही मशहूर बनना है चाहे कितना भी गलत काम करना क्यों  न पड़े। यही जुनून उसे समाज के उस दलदल की ओर ले जाने लगा जहां जाना तो आसान था। लौटना काफी मुश्किल। वह अपने परिवार से छुप छुप कर यह सब करता था। परिवार वालों को ये पता था कि मेरा लड़का घर से बाहर रहकर पढाई कर रहा है लेकिन उन्हें क्य...